Fundamental Duties Part-4 Article 51-A |

Fundamental Duties Part-4 Article 51-A :- केटलिन के शब्दों में, “नागरिकता एक व्यक्ति की वैधानिक स्थिति है जो राजनीतिक रूप से संगठित समाज की सदस्यता प्राप्त करके विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों की ओर जाता है।” जब कोई व्यक्ति नागरिकता प्राप्त करता है, तो उसी के बेहतर निर्वहन के लिए मौलिक अधिकारों की आवश्यकता होती है, जबकि राज्य भी नागरिकों से अपेक्षा करता है कि वे राज्य की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन करें। गौरतलब है कि पिछले दिनों संविधान दिवस के अवसर पर संसद के संयुक्त सत्र में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवैधानिक कर्तव्यों के महत्व पर जोर दिया, सेवा और कर्तव्यों के बीच अंतर को स्पष्ट किया।

Fundamental Duties Part-4 Article 51-A संविधान के प्रारंभ में मूल कर्तव्य का समावेश नहीं था –

  • 1976 में “इंदिरा गांधी” की सरकार द्वारा “स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर पूर्व सोवियत संघ से प्रेरित होकर 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा भाग भाग 4 में जोड़कर तथा अनुच्छेद 51 में जोड़कर 10 मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया है |
  • 86 वें संशोधन द्वारा – एक मौलिक कर्तव्य (6 से 14) वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा जुड़ने के बाद इसकी इनकी संख्या 11 हो गई है |
  • उल्लेखनीय है कि इनके दंड(Punishment) का प्रावधान संविधान में नहीं है  |
  • किंतु इधर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय से विकसित परंपरा के अनुसार मूल कर्तव्यों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट दंड दे सकती है  |

मौलिक कर्तव्यों में 11

मौलिक कर्तव्यों में –

1.  संविधान का पालन राष्ट्र ध्वज राष्ट्रगान का आदर

2. राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्श

3. एकता एवं अखंडता

4. देश की रक्षा एवं सेवा

5. सभी लोगों में समान भ्रातृत्व भावना

6. मिश्रित संस्कृति का संरक्षण

7. पर्यावरण सुरक्षा

8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानववाद

9. सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा

10.वित्त एवं सामूहिक क्षेत्र में उत्कर्ष

11.6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षित करने का अभिभावकों का दायित्व

संविधान लागू होने के 26 वर्ष बाद ?- मूल कर्तव्यों को शामिल करना आलोचना का विषय रहा |

रोचक है कि

  • लोकतांत्रिक देश में मूल कर्तव्यों का प्रावधान नहीं होता है |
  • इन कर्तव्यों को जोड़ने के पीछे सरकार का तर्क था कि इससे लोगों में लोकतांत्रिक भावना का विकास होगा |
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा नवीन जिंदल के केस में या निर्णय लिया गया कि झंडारोहण का अधिकार अनुच्छेद 19 (1A) के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है |
  • कोई भी व्यक्ति केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही झंडा सकता है |
  • इसे वस्त्र यकीन नहीं करना चाहिए |
  • अंत्येष्टि के कफन के रूप में प्रयोग ना करें |
  • वाहनों पर झंडा ना लपेटे |
  • इसका ऊपरी भाग नीचे अर्थात उल्टा करके ना फहराए  |
  • वह किसी जमीन से स्पर्श नहीं करना चाहिए |
  • क्षतिग्रस्त झंडे को ना पढ़ाएं फहराए |
  • संशोधित संहिता 26 जनवरी 2002 से लागू की गई |
Fundamental Duties Part-4 Article 51-A
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कर्तव्य की अवधारणा

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है – कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जहाँ लोकतंत्र की गौरवशाली परंपरा प्राचीन काल से ही मौजूद है।

प्रसिद्ध इतिहासकार के.के. पी। जायसवाल के अनुसार, प्राचीन भारत में गणतंत्र की अवधारणा रोमन या ग्रीक गणतंत्र प्रणाली से पुरानी है।

इतिहासकारों का मानना है कि इस प्राचीन अवधारणा में भारतीय लोकतंत्र के वर्तमान स्वरूप की कहानी छिपी हुई है।

भारत में प्राचीन काल से कर्तव्यों का निर्वहन करने की परंपरा रही है और जोर किसी व्यक्ति के “कर्तव्यों” (कर्ताव्य) पर रहा है।

भगवद गीता और रामायण भी लोगों को अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए प्रेरित करती हैं”, जैसा कि भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं कि “फल की अपेक्षा किए बिना अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।”

गांधीजी का विचार था कि “हमारे कर्तव्य हमारे अधिकारों के सही स्रोत हैं और यदि हम अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन करते हैं तो हमें अधिकारों की माँग करने की आवश्यकता नहीं होगी।”

भारतीय संविधान और कर्तव्य  – (Fundamental Duties Part-4 Article 51-A)

  • भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को संतुलित करता है।
  • यह ज्ञात है कि आपातकाल के दौरान, भारत के संविधान के भाग IV-A को 42 वें संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से मौलिक कर्तव्यों में शामिल किया गया था।
  • पहले मौलिक अधिकारों की अवधारणा को मूल संविधान में रखा गया था, लेकिन इसमें मौलिक कर्तव्यों को शामिल नहीं किया गया था।
  • वर्तमान में अनुच्छेद 51 (A) के तहत 11 मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है, जिनमें से 10 को 42 वें संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया |
  • जबकि 11 वें मौलिक कर्तव्यों को वर्ष 2002 में 86 वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संविधान में शामिल किया गया था।
  • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा तत्कालीन यूएसएसआर के संविधान से प्रेरित है।
Fundamental Duties Part-4 Article 51-A
Fundamental Duties Part-4 Article 51-A
Must read :–
राजभाषा(Official Language)
मूल कर्तव्य (Core Duties)
महत्वपूर्ण संविधान संशोधन(Important Constitution Amendment)
Vice-President -(उपराष्ट्रपति )
भारतीय संविधान(Indian Constitution)
संविधान के स्रोत : प्रकृति एवं विशेषताएं
संविधान की प्रस्तावना(Preamble to the Constitution)
नागरिकता(Citizenship)
मूल अधिकार (Fundamental Rights)
Directive Principles of Policy (Part -4, Articles 36 – 51)

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